Siddh Ring

​शेयर बाज़ार एक ऐसा बाज़ार है, जहाँ का राजा प्रतिदिन बदलता रहता है। इस बाज़ार में आने वाला  प्रत्येक व्यक्ति पहले कर्म को प्रधान मानता है, परन्तु कुछ ही समय में भाग्य के हाथों विवश होकर जल्दी ही इस मैदान को छोड़ देता है।

क्या आप जानते हैं ? शेयर बाज़ार में धन बनाने का सारा क्रेडिट व्यक्ति की कुंडली में बनी ग्रह स्थिति के ऊपर निर्भर करती है। शेयर बाज़ार या फिर कमोडिटी बाज़ार सट्टा, जुआ या फिर लाटरी से कम नहीं है। कुंडली में स्थित राहू - चंद्रमा का बैड इम्पेक्ट शेयर मार्केट में पैसा डूबा देता है और वहीं गुरु - बुद्ध का सकारात्मक संयोग खूब मुनाफ़ा देता है। 

लेकिन हम जानते हैं, कि ग्रहों के बुरे प्रभाव को भी कुछ ख़ास विधियों द्वारा शांत किया जा सकता है, ऐसी ही कुछ ख़ास विधियों द्वारा एक विशेष सिद्ध अंगूठी तैयार की गयी है, जो मनुष्य के ऊपर ग्रहों के बुरे प्रभाव को लगभग शांत कर देती है। और यह अंगूठी शेयर बाज़ार के लिए कार्यरत ग्रहों को अपने जातक के सानिध्य में लाने का प्रयास करती है।

हम यहाँ प्रयास "शब्द" ही कह रहे हैं कियोंकि कुछ जातकों पर इसका बेहद सकारत्मक प्रभाव देखा गया है और कुछ पर ये पूर्ण रूप से निष्किय ही रही हैं। इसका मुख्य कारण जातकों का अंगूठी और अपने ईष्ट पर पूर्ण विस्वास का होना होता है, कियोंकि कुछ जातक इसे मात्र अंगूठी ही मानते है और पूर्ण विस्वास के साथ धारण नहीं करते जबकि कुछ इस अंगूठी पर और अपने ईष्ट पर पूर्ण भरोसा करते हैं।

इस सिद्ध अंगूठी 97 प्रतिशत चांदी और उसमें 3 प्रतिशत तांबा के मिश्रण से तैयार करने के पश्चात इस पर धन की देवी माँ लक्ष्मी का एक विशेष मंत्र उकेरा जाता है और उसके पश्चात इसे 40 दिनों तक जल और विशेष रूप से तैयार लोबान रस में रखा जाता है और इस पर १२५००० मन्त्रों की आहुति दी जाती है  यह सभी विधियां  पंडित हरिशंकर जाडोलिया जी की देख रेख में तैयार की जाती है। 

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किसे धारण करना चाहिए ?

  • जिस व्यक्ति को भाग्य, ग्रह-चाल, और अपने ईष्ट पर विस्वास हो तभी इसे धारण करे। अन्यथा ये मात्र एक अंगूठी ही बनकर रह जाती है।   

  • ​शेयर-बाजार में अधिक नुक्सान ले चुका हो, और एक बार फिर से अपना भाग्य इस बाजार में अजमाना चाह रहा हो

  • जो नियमों का पालन पूर्ण रूप से कर सकेकृपया ध्यान दें - नीचे नियमों की लिस्ट दी गयी है, एक बार उन्हें अवश्य पढ़ें और उसके बाद ही सिद्ध अंगूठी को खरीदें।

  • जो भाग्य और कर्म को एक ही सिक्के के दो पहलू माने और विस्वास करे कि बिना कर्म किये भाग्य नहीं चमकेगा।

  • जैसा की पहले भी लिखा जा चुका है की नीचे धारण करने के लिए कुछ नियम और धारण करने के बाद कुछ नियमों का पालन करना आवश्यक है अत: दी गयी लिस्ट को ध्यान से पढ़ें और उसके पश्चात ही खरीदें।

किसे धारण नहीं करना चाहिए ?

  • जिन जातकों की कुंडली में सूर्य और राहू अथवा गुरु और राहू की युति बन रही हो, उन्हें यह सिद्ध अंगूठी नहीं पहननी चाहिए

  • जिन व्यक्तियों ने अपने जीवन में कभी किसी काले कुत्ते की ह्त्या की हो, अन्यथा किसी बाल कन्या के साथ दुर्व्यवहार किया हो उन्हें भी यह सिद्ध अंगूठी को धारण नहीं करना चाहिए।

  • जिन व्यक्तियों को भाग्य, ग्रह-चाल, और अपने ईष्ट पर विस्वास ना हो तो उनको भी यह सिद्ध अंगूठी धारण नहीं करनी चाहिए

  • ​जो व्यक्ति नीचे दे गयी नियमों की लिस्ट को पूर्ण रूप से पालन ना कर सकता हो उसे भी यह सिद्ध अंगूठी धारण नहीं करनी चाहिए।

धारण करने के पश्चात के नियम -

  • महीने में एकबार किसी भी बुद्धवार को काले कुत्ते को मीठी रोटी अवश्य दें, यदि संभव हो तो प्रत्येक बुद्धवार का ये नियम बना लें तो और अधिक लाभ मिलेगा

  • साल में एक बार हरे कपडे किन्नरों को दान करें।

  • अपने ईष्ट के सामने सप्ताह में एक बार घी का दीपक अवश्य जलाएं।

  • किसी भी कुत्ते को लात से ना मारें। 

  • छोटी कन्या पर हाथ ना उठायें।

  • ​महीने में एक बार मंदिर अवश्य जाएँ और सरसों के तेल का दीपक जलाएं और उस दीपक में काले तिल अवश्य डालें।

​यदि आप इन नियमों का पालन नहीं कर सकते, तो इस सिद्ध अंगूठी को ना धारण करें, अन्यथा यह मात्र एक साधारण आभूषण बनकर ही रह जायेगी।

सिद्ध अंगूठी को धारण करने का तरीका -

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  • यह सिद्ध अंगूठी आपको अपने सीधे हाथ की तर्जनी उंगली में पहननी होती है, पर अगर आपने इस उंगली में कोई और अंगूठी पहन रखी है, तो आप उसका स्थान परिवर्तित कर दें। पर आपको इस सिद्ध अंगूठी का स्थान परिवर्तन नहीं करना है।

  • सिद्ध अंगूठी को कुछ इस प्रकार से पहने की उसके मन्त्र आपको सीधे दिखाई दें और सामने वाले को उलटे

  • सिद्ध अंगूठी को पहनने का दिन सोमवार अथवा शुक्रवार है, अन्य किसी और दिन इसे धारण ना करें।

  • यदि सोमवार अथवा शुक्रवार शुक्ल पक्ष में आ रहा है तो अति उत्तम है।

  • सर्वप्रथम सिद्ध अंगूठी को गंगाजल व कच्चे दूध में 24 घंटे तक डूबोये रखें, इस प्रक्रिया को करने के लिए एक मध्यम आकार की कटोरी लें और उसे गंगाजल और दूध के मिश्रण से भर लें। और उसके पश्चात सिद्ध अंगूठी को साधारण पानी से धोकर उस कटोरी में अगले 24 घंटे के लिए डाल दें। और जब आपको सिद्ध अंगूठी को धारण करना हो तो उसे कटोरी से निकालें और कटोरी में भरे दूध और गंगाजल के मिश्रण को किसी पेड़ या पोधे की जड़ में डाल दें।

  • सिद्ध अंगूठी पहनने से पहले आप विष्णु भगवान व माँ लक्ष्मी का पूजन अवश्य करें।

  • सिद्ध अंगूठी पहनने के पश्चात 40 दिनों तक संध्या समय में एक दीपक माँ लक्ष्मी के नाम का घर के किसी भी कोने में जलाएं।

  • और 40 दिनों के पश्चात शेयर व कमोडिटी बाज़ार में अपने कार्य को प्रारंभ कर दें। 

  • ​महीने में एक बार अपनी सिद्ध अंगूठी को उंगली से उतारकर गंगाजल और कच्चे दूध के मिश्रण में १२ घंटे के लिए अवश्य डुबो कर रखें और फिर से पहना लें, यह प्रक्रिया प्रत्येक महीने करें।

जिस समय आप सिद्ध अंगूठी को प्रथम बार धारण करें, उसके अगले 40 दिनों तक शेयर बाज़ार से दूर रहें, और यदि कार्य करना भी पड़े तो बहुत कम मात्रा में करें। 

​इन 40 दिनों के लिए में यहाँ आपको 2 किताबों को पढने की सलाह दूंगा और संभव हो तो इन दोनों किताबों को इन 40 दिनों के भीतर पढ़ लें।

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सिद्ध अंगूठी को खरीदने के लिए नीचे दिए गये "अभी खरीदें" बटन का प्रयोग करें और पेमेंट करने के पश्चात 7 से 9 दिनों के अन्दर आपको कुरियर के मध्यम से सिद्ध अंगूठी प्राप्त हो जायेगी, जिसके साथ धारण करने के नियम की सारणी भी होगी

अन्य किसी भी प्रकार की सहायता के लिए आप हमें 88-6-888-2067 नंबर पर कॉल कर सकते हैं।